रामनरेश त्रिपाठी (काव्य-खण्ड)

निर्भय स्वागत करो मृत्यु का,मृत्यु एक है विश्राम स्थल।जीव जहां से फिर चलता है,धारण कर नव जीवन संबल।मृत्यु एक सरिता …

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